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I like to live the Dream of mother teresa. I pray to Lord give me strength to help less poor and less fortunate youth, kids, women and humans of all ages

Thursday, September 27, 2012

स्व.आयुवान सिंह शेखावत,हुडील: राजपूत और भविष्य : मौत के मुंह में -2

स्व.आयुवान सिंह शेखावत,हुडील: राजपूत और भविष्य : मौत के मुंह में -2: भाग एक से आगे.... पाकिस्तान की स्थापना कांग्रेस ने इसलिए कराई कि जिससे देश का प्रबल और प्रभावशाली मुस्लिम-वर्ग शेष भारत से प्रथक होकर अन्य...

Thursday, September 20, 2012


रास्ते बदल गये
लेखिका - कमलेश चौहान ( गौरी)

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माना की ये उस मालिक का दस्तूर है
कुछ पल सब कुछ है
कुछ पल देखो तो कुछ भी नहीं

कल जो दिल के करीब था , आज भी है
अब, सात समुद्र पार है
कल जो अपना था वो आज कहीं नहीं


आह ! हम बहक गए थे किसी के बातो से
कैसे कटेगी ज़िन्दगी
मत पूछो जिसकी हमें खबर नहीं

चाँद महका था अमावस की रातो के बाद
वोह कौनसी थी रात थी
मुझसे मत पूछो अब कुछ याद नहीं

उसने न जाने अनेको नाम लिख दिए थे
अपने दिल पे
मेरा नाम याद रहे ,यह जरूरी तो नहीं

दो रोज़ का हसना हसाना ,गुनगुनाना
हसीं वादियों में
अब वोह सर्द राते परायी है मेरी नहीं

भूली बिसरी यादो , दिल मे बसेरा मत करो
वोह जो निकला बेवफा
उस दोस्त का नाम उसका नाम दुहराना कोई ज़रूरी नहीं
Any Manipulation of Exploitation  will  creates Leagal Action Of this Poem as its Copy Rights @ Kamlesh Chauhan